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लेखनी कहानी -16-Jul-2022

                विषय :- मंजिल की चाह 


 माना की ,
        राह की पहचान ,थोडी देर से हुई ।
        मंजिल को पाने की तडप, थोडी देर से लगी ।।

   जिसे हमने, बीच राह मे छोडा था ।
   उसे पूरा करने की लत ,थोडी देर से लगी ।।

ख्वाहिशो मे बहकर ,कुछ और करने चले थे
मुझे मेरे मुकाम पर पहुॅचने की तडप ,थोडी देर से लगी ।।

थोडी सी पहचान हमे भी बनानी है ,
भूले हुए पथिक को राह हमे भी दिखानी है।
अधूरी न रह जाए हर किसी की मंजिल, 
थोडी सी समझ हमे भी बतानी है ।।

  🖎🖎🖎 रबिना विश्वकर्मा

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10 Comments

Seema Priyadarshini sahay

18-Jul-2022 04:27 PM

बहुत ही खूबसूरत

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Rahman

17-Jul-2022 09:46 PM

👍👍👍👍

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Saba Rahman

17-Jul-2022 08:35 PM

Nice

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